US डीजल प्राइस में अब तक की सबसे तेज़ वार्षिक बढ़त देखने को मिली है, जिससे एक बार फिर मंदी को लेकर चिंता बढ़ गई है कि यह अभी भी नियंत्रण से बाहर है।
Bloomberg Intelligence के सीनियर कमॉडिटी स्ट्रैटेजिस्ट Mike McGlone ने कहा कि यह प्राइस मूवमेंट एक पुराने आर्थिक टर्निंग प्वाइंट की याद दिलाता है। उन्होंने 2008 का उदाहरण दिया, जब $4 पेट्रोल के प्राइस ने पीक बनाया था, उसके बाद प्राइस क्रैश हो गए थे।
डीजल प्राइस और मंदी का रिकॉर्ड
Bloomberg का हीटिंग ऑइल इंडेक्स पिछले साल में 150% ऊपर गया है। यह इंडेक्स के इतिहास की सबसे बड़ी वार्षिक ग्रोथ है, जो 1987 से ट्रैक हो रहा है।
McGlone ने कहा कि अभी के डीजल प्राइस सीधे तौर पर पिछले बड़े फ्यूल शॉक से मेल खाते हैं।
“यह $6.50 डीजल प्राइस बिलकुल वैसा ही है जैसे 2008 में पेट्रोल का $4 प्रति गैलन का प्राइस पीक था।”
2008 की ये तेजी डिमांड में तेज गिरावट से पहले आई थी, जब कंज्यूमर और बिजनेस ने फ्यूल यूज़ कम कर दिया था। McGlone के मुताबिक, अब भी ऐसी ही रिवर्सल या “डिमांड destruction” संभव है।
Fed के लिए क्यों है यह अहम?
डीजल और हीटिंग ऑइल के खर्च सीधे हेडलाइन मंदी के आंकड़ों को प्रभावित करते हैं। विंटर आने से पहले फ्यूल प्राइस बढ़ना इन आंकड़ों को कई महीनों तक ऊपर बनाए रख सकता है।
इससे Federal Reserve के रेट-सेटिंग डिसीजन जटिल हो जाते हैं। पॉलिसीमेकर पहले ही कमेटी के अंदर से आ रही कड़ी मांग और लेबर मार्केट में स्थिरता के संकेतों के बीच संतुलन बना रहे हैं।
Cleveland Fed की प्रेसिडेंट Beth Hammack ने भी हाउसहोल्ड्स पर इसी तरह के दबाव की ओर इशारा किया है। उन्होंने कहा कि कई कंज्यूमर्स पहले ही स्टेक छोड़कर सस्ते फूड जैसे हॉट डॉग और बीन्स पर आ गए हैं। अब इनके पास खर्च कम करने के ज्यादा विकल्प नहीं बचे।
Atlanta Fed के सर्वे के अनुसार बिज़नेस की मंदी को लेकर उम्मीदें भी बढ़ रही हैं। यह इसलिए अहम है क्योंकि बिजनेसेज़ आम कंज्यूमर्स से ज्यादा प्राइसिंग सिग्नल्स को ट्रैक करते हैं।
अगर डीजल की बढ़ती लागत के साथ ये उम्मीदें भी बढ़ती हैं, तो Fed के लिए काम और मुश्किल हो जाएगा। यह दबाव इस हफ्ते के Personal Consumption Expenditures (PCE) inflation डेटा से ठीक पहले आ गया है।
ऊंची डीजल लागत का असर फ्रेट, एग्रीकल्चर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स पर दिखता है, जो ट्रांसपोर्टेशन खर्चों पर काफी निर्भर हैं। एनालिस्ट्स देखेंगे कि क्या इस बार की तेजी से 2008 जैसा डिमांड में गिरावट आएगी या फिर लगातार चल रही सप्लाई प्रॉब्लम्स के चलते प्राइस लंबे वक्त तक ऊपर रह सकते हैं।









