भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), जो देश का केंद्रीय बैंक है, ने एक बार फिर उस क्रिप्टोकरेन्सी पॉलिसी का समर्थन किया है जिसमें मुख्य रूप से प्रतिबंध-प्रधान अप्रोच को प्राथमिकता दी गई है।
RBI चाहता है कि बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशंस को क्रिप्टो एसेट्स और प्राइवेटली इश्यू किए गए stablecoins से पूरी तरह दूर रखा जाए।
भारत का केंद्रीय बैंक क्रिप्टो पर प्रतिबंध की ओर क्यों झुकता है
RBI लगातार क्रिप्टो से जुड़े रिस्क को लेकर चेतावनी देता आ रहा है और अब उसने पॉलिसी में “प्रोहिबिशन की ओर झुकाव” को जरूरी बताया है, जैसा कि इस सप्ताह Reuters द्वारा देखे गए डॉक्युमेंट्स में है। RBI चाहता है कि डिजिटल एसेट्स को रेगुलेटेड फाइनेंशियल सिस्टम से बाहर ही रखा जाए। अधिकारियों के अनुसार इसका मकसद लेंडर्स तक रिस्क फैलने से रोकना है।
यह रुख 2018 में शुरू हुई उस जंग को याद दिलाता है, जिसमें कोर्ट ने RBI की उन पॉलिसीज को खारिज कर दिया था जो क्रिप्टो डीलिंग्स को असल में बैन कर रही थीं। तब से डिजिटल एसेट्स एक ग्रे ज़ोन में मौजूद हैं।
फिलहाल भारतीय बैंक क्रिप्टोकरेन्सीज के साथ काम करने की परमिशन रखते हैं। लेकिन बार-बार RBI की चेतावनी के कारण ज़्यादातर बड़े बैंक इस सेक्टर से दूर बने हुए हैं।
यह निगरानी रेखा ग्लोबल फ्रेमवर्क्स में देखी गई सतर्कता की याद दिलाती है, हालांकि ज्यादातर देश अब isolation की जगह regulation को प्राथमिकता देते हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में करीब 3.9 करोड़ क्रिप्टो ट्रेडर्स हैं। टैक्स डिपार्टमेंट की गणना के अनुसार, मई के आखिर में इनके पास लगभग $2.1 बिलियन के डिजिटल एसेट्स थे।
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Stablecoins और Offshore ट्रेडिंग से बढ़ गया रिस्क
RBI ने stablecoins – फिएट करेंसी से लिंक्ड टोकन – को लेकर भी अपनी चेतावनी दोहराई। RBI का कहना है कि विदेशी करेंसियों से जुड़े stablecoin देश की monetary sovereignty के लिए खतरा हैं। वहीं रुपये से जुड़े टोकन सरकार की करंसी इनकम घटा सकते हैं और मार्केट में दबाव के समय stability पर असर डाल सकते हैं।
RBI का कहना है कि अगर stablecoins की अनुमति दी जाती है तो क्रिप्टोकरेंसी मुनाफे की पहचान और टैक्स वसूलना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि ऐसे में होल्डर्स को अपने holding को फिएट करंसी में बदलने की जरूरत ही नहीं होगी।
साथ ही, टैक्स डिपार्टमेंट ने offshore exchanges और प्राइवेट वॉलेट्स को ट्रैकिंग में रुकावट बताया है। इन चैनलों के जरिये असल होल्डर को पहचानना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, रुपये में Peer-to-Peer ट्रेडिंग से टैक्सेबल इनकम का पता लगाना भी बेहद मुश्किल हो जाता है।
Compliance पहले से ही काफी पीछे है। मार्च 2023 तक समाप्त वर्ष में 6,45,000 लोगों में से केवल एक चौथाई से भी कम लोगों ने अपनी टैक्स रिटर्न में क्रिप्टो ट्रेडिंग को दिखाया। भारत में क्रिप्टो से होने वाले मुनाफे पर 30% टैक्स लगता है और हर एक ट्रेड पर 1% टैक्स लिया जाता है।
आने वाले महीनों में ये साफ होगा कि सरकार RBI के प्रतिबंधी रवैये को कानून में बदलती है या क्रिप्टो को अनिश्चितता की स्थिति में ही रहने देती है।
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