Polymarket अब ज्यादा ट्रेडर्स को अपनी पहचान वेरीफाई करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है और VPN यूज पर सख्त कार्रवाई कर रहा है। यह उसके पुराने परमिशनलेस ट्रेडिंग मॉडल से बिल्कुल अलग रुख दिखाता है।
दुनिया के सबसे बड़े prediction market पर अब उसके ऑपरेशंस को लेकर sanctions, लीगल और रेग्युलेटरी दबाव बढ़ता जा रहा है। House Oversight Committee के इन्वेस्टिगेटर्स ने Polymarket से 5 जून तक KYC और जियोग्राफिक एनफोर्समेंट रिकॉर्ड्स मांगे हैं।
आम यूजर्स के लिए क्या बदलाव होंगे
The Information की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी अब ट्रेडर्स से वॉलंटरी आइडेंटिटी चेक कराने की कोशिश कर रही है और सस्पिशियस अकाउंट्स पर लगाम कस रही है।
ज्यादातर इंटरनेशनल यूजर्स अब भी बेसिक वॉलेट-कनेक्ट ट्रेडिंग कर सकते हैं और Polygon पर USD Coin (USDC) डिपॉजिट कर सकते हैं, बिना कोई पर्सनल डॉक्युमेंट अपलोड किए।
हालांकि, अब यह परमिशनलेस एक्सेस सभी के लिए गारंटीड नहीं है। Polymarket अब VPN यूज पर सख्ती से नजर रख रहा है। जो अकाउंट्स IP-बेस्ड जियोब्लॉक्स को बायपास करने की कोशिश करेंगे, उनका अकाउंट सस्पेंड या हमेशा के लिए बैन किया जा सकता है।
अगर कोई ट्रेडर सात-फिगर पोजिशन चला रहा है या बहुत जल्दी-जल्दी फाइव-फिगर डिपॉजिट-ट्रेड-विदड्रॉ साइकिल कर रहा है, तो इंटरनल एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग थ्रेशोल्ड के तहत उसकी वेरिफिकेशन ट्रिगर हो सकती है।
वो यूजर्स जो वॉलंटरी KYC या KYB फॉर्म भरते हैं, उन्हें कुछ फायदे मिलते हैं। इसमें Polymarket के मेन सर्वर्स पर डायरेक्ट को-लोकेशन शामिल है, जिससे एक्टिव ट्रेडर्स के लिए लेटेंसी कम हो जाती है।
रेग्युलेटरी दबाव बढ़ रहा है
इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म, Polymarket US से अलग रहता है। US ब्रांच में, 2025 में CFTC-लाइसेंस्ड exchange के एक्विजिशन के बाद से, फुल KYC जरुरी है।
ये बदलाव 2022 के $1.4 मिलियन के CFTC सेटलमेंट के बाद हुआ, जो कि अनरजिस्टरड बाइनरी ऑप्शंस को लेकर हुआ था।
अब 33 से ज्यादा देशों में Polymarket पर फुल रेस्ट्रिक्शंस या टेक्निकल ब्लॉक्स लग चुके हैं। इनमें OFAC-संक्रांत स्टेट्स से लेकर, स्ट्रिक्ट गैम्बलिंग रूल्स वाले इलाकों तक शामिल हैं।
मजबूत कंप्लायंस अपनाने से प्लेटफॉर्म शटडाउन, विडड्रॉ ब्लॉक और आगे रेग्युलेटरी कार्रवाई का खतरा कम हो सकता है। हालांकि, प्राइवेसी पर फोकस करने वाले ट्रेडर्स प्लेटफॉर्म की खासियत का कुछ हिस्सा खो सकते हैं।
इसलिए इंटरनेशनल यूजर्स के लिए साफ संदेश है: उन्हीं देशों में वॉलेट के जरिए ट्रेड करें जहां इजाजत है, VPN बायपास से बचें और अगर आपकी एक्टिविटी असामान्य दिखे, तो अपनी पहचान बताने के लिए तैयार रहें।
कुल मिलाकर, ट्रेंड यह है कि आगे और कड़े कंट्रोल्स देखने को मिल सकते हैं – भले ही फ्रंट डोर खुली ही क्यों न रहे।





