Ripple के CEO Brad Garlinghouse ने डच सेंट्रल बैंक की $11 बिलियन की गोल्ड मूव पर अपनी राय रखी है। उनका कहना है कि ग्लोबल फाइनेंस अब भी 1940s के जैसे पैसे ट्रांसफर करता है।
De Nederlandsche Bank ने मार्च से अगस्त के बीच लगभग 86 टन गोल्ड London भेजा। यह सोना New York और Ottawa से आया था।
Ripple CEO का कहना है कि गोल्ड मूव क्रिप्टो की अहमियत साबित करता है
डच सेंट्रल बैंक ने New York में करीब 59 टन गोल्ड बेच दिया था, फिर उतनी ही मात्रा में London में सोना खरीदा। यानी लगभग 70% ट्रांसफर सिर्फ कागजी लेन-देन था।
असल में केवल 27 टन सोना अटलांटिक पार गया। अब New York में डच रिजर्व्स का 18.5% हिस्सा है, जो पहले 31.3% था। वहीं, London का शेयर बढ़कर 32.1% हो गया। DNB के पास कुल 612.4 टन गोल्ड है, जिसकी वैल्यू 2025 के आखिर में 72.2 बिलियन यूरो थी।
Garlinghouse ने इस मुश्किल प्रक्रिया की तुलना क्रिप्टो के बीते दशक से की। उन्होंने कहा कि यह सेक्टर $1.5 बिलियन के एक्सपेरिमेंट से $2.7 ट्रिलियन के एसेट क्लास में बदल चुका है।
उन्होंने जर्मनी के 2013 के repatriation को भी याद किया। उस समय Bundesbank को करीब 674 टन, लगभग $36 बिलियन के सोने की घर वापसी में 4 साल लगे थे।
पुराने तरीके अब भी दुनिया के पैसे ट्रांसफर कर रहे हैं
DNB के गवर्नर Olaf Sleijpen ने इस ट्रांसफर को वॉशिंगटन से अविश्वास नहीं, बल्कि क्राइसिस तैयारी बताया। London में Ottawa से कहीं ज्यादा फिजिकल गोल्ड ट्रेड होता है।
“इस ट्रांसफर के साथ हमने अपने गोल्ड रिजर्व्स की ट्रेडबिलिटी बेहतर की है। हमें उम्मीद है कि इसकी कभी जरूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन अपनी तैयारियों और मजबूती को मजबूत करना जरूरी है।”
Sleijpen, DNB
यह पूरी प्रोसेस Garlinghouse की परेशानी को सपोर्ट करती है। बैंक्स वैल्यू को correspondent queues के जरिए सेटल करते हैं, जबकि stablecoins से भुगतान तुरंत क्लियर होता है। SWIFT ने जुलाई में अपना ब्लॉकचेन लेजर शुरू किया, लेकिन फाइनल सेटलमेंट अब भी पुराने सिस्टम पर ही होता है।
Garlinghouse ने यही बात Mastercard डील जून वाले महीने में भी कही थी। XRP लगभग $1.40 के करीब ट्रेड हो रहा है, जो आज 3.65% नीचे है लेकिन पिछले तीन महीनों में 21% ऊपर गया है।
Central banks के द्वारा संचालित Bank for International Settlements ने इस महीने XRP Ledger का टेस्ट किया। इसकी प्रोटोटाइप ने ऑफिशियल स्टैटिस्टिक्स को तीन से पांच सेकंड में एंकर किया। वेरिफिकेशन में एक से दो सेकंड लगे।
तो क्या क्रिप्टो इससे बेहतर कर सकती है? स्पीड के मामले में तो जवाब हाँ है। ट्रस्ट के मामले में अभी नहीं। Central banks को वॉल्ट्स, इंश्योरेंस और लीगल फाइनलिटी चाहिए।
Sleijpen का गोल्ड को London शिफ्ट करने का फैसला crisis टाइम की ट्रेडेबिलिटी की जरुरत के कारण हुआ था, जो एक तरह की स्ट्रक्चरल सिक्योरिटी है, जिसे डिजिटल एसेट्स अभी भी रीप्लिकेट करने की कोशिश कर रहे हैं।









