इस समय परपैचुअल फ्यूचर्स क्रिप्टो की सबसे एक्टिव ट्रेडिंग कैटेगरी है। DefiLlama डेटा के मुताबिक, 3 जुलाई, 2026 को 24 घंटों में perp DEX वॉल्यूम $21.9 बिलियन रहा, जबकि डेरिवेटिव्स प्रोटोकॉल पर ओपन इंटरेस्ट लगभग $15.5 बिलियन था।
लेकिन मार्केट में Hyperliquid का दबदबा है। इस exchange ने सेक्टर में 30 दिन के perp वॉल्यूम में लगभग $250.5 बिलियन के साथ लीड किया, जिससे टॉप पर कोई सीरियस कॉम्पिटिशन नहीं रह गया।
यही वजह है कि नई ट्रेडिंग चेन अब भी मार्केट में आ रही हैं। डिमांड तो साफ है, लेकिन विनर को अभी रेग्युलेशन, ब्रांड लॉयल्टी या गहरी इंस्टीटूशनल लॉक-इन का कोई प्रोटेक्शन नहीं है।
AFX नए चैलेंजर्स में से एक है। यह एक सॉवरेन Layer 1 है जो परपैचुअल फ्यूचर्स के इर्द-गिर्द बना है। इसमें फुली ऑन-चेन ऑर्डर बुक, ऑन-चेन मैचिंग और सेटलमेंट, जीरो-गैस एक्सीक्यूशन, 100ms मीडिया लेटेंसी, फेयर ऑर्डरिंग और MEV-रेजिस्टेंट प्रोटेक्शन है।
कागजों पर इसका पिच लंबा है, लेकिन असली मकसद सिंपल है: ट्रेडर्स को Hyperliquid जैसी स्पीड और लिक्विडिटी देना, लेकिन ज्यादा से ज्यादा ट्रेडिंग स्टैक को पूरी तरह ऑन-चेन लाना।
| प्लेटफॉर्म | कोर मॉडल | क्या साबित किया | AFX कहाँ अलग है |
| Hyperliquid | कस्टम ट्रेडिंग L1 | डीप perp लिक्विडिटी और मजबूत ट्रेडर एडॉप्शन | AFX भी ट्रेडिंग-चेन थिसिस फॉलो करता है, लेकिन बहुत पहले बेस से |
| dYdX Chain | Cosmos-बेस्ड ऐपचेन | Perp DEXs शेयर किए गए एक्सीक्यूशन एनवायरनमेंट छोड़ सकते हैं | AFX और ज्यादा ऑर्डर फ्लो और मैचिंग प्रोसेस ऑन-चेन करता है |
| GMX | पूल्ड लिक्विडिटी और oracle प्राइसिंग | ट्रेडर्स सेंट्रल ऑर्डर बुक के बिना पूल-बैक्ड लीवरेज का यूज करेंगे | AFX एक्सचेंज-स्टाइल ऑर्डर बुक ट्रेडिंग के इर्द-गिर्द बना है |
| Drift | Solana-नेटिव हाइब्रिड मॉडल | फास्ट एक्सीक्यूशन एक्टिव perp ट्रेडिंग को सपोर्ट कर सकता है | AFX Solana इन्फ्रास्ट्रक्चर की जगह सॉवरेन L1 यूज करता है |
| Lighter | ZK-वेरिफाइड डेरिवेटिव्स | वेरिफिकेशन Exchange डिज़ाइन का हिस्सा बन सकता है | सारे फीस यूजर्स को री-डिस्ट्रिब्यूट होती है |
| Aevo | Rollup-बेस्ड डेरिवेटिव्स | डेरिवेटिव्स एक डेडिकेटेड रोलअप के जरिए चल सकते हैं | AFX ज्यादा वर्टिकली कंट्रोल्ड L1 रूट लेता है |
य comparaफ तुलना ये नहीं है कि AFX में इन प्लेटफ़ॉर्म्स से ज्यादा फीचर्स हैं या नहीं। असली सवाल ये है कि इसका डिज़ाइन लाइव ट्रेडिंग के दौरान आने वाली असली समस्याएं सुलझाता है या नहीं: तेज़ ऑर्डर प्लेसमेंट, भरोसेमंद कैंसिलेशन, गहरी मेकर liquidity, स्थिर लिक्विडेशन और जब मार्केट तेजी से मूव करती है तब predictable execution.
AFX Vs. Hyperliquid और dYdX
AFX सबसे करीब Hyperliquid और dYdX के बैठता है, लेकिन तुलना टेक्निकल से ज्यादा प्रैक्टिकल है, कोई एक-से-एक तुलना नहीं है।
Hyperliquid liquidity का बेंचमार्क है। ये पहले ही प्रूव कर चुका है कि एक कस्टम ट्रेडिंग L1 सीरियस perp वॉल्यूम, ओपन इंटरेस्ट, और ट्रेडर माइंडशेयर को अट्रैक्ट कर सकता है।
AFX भी इसी तरह की हाई-पर्फॉर्मेंस ट्रेडिंग-चेन थ्योरी फॉलो करता है, जिसमें 100ms मीडियन लेटेंसी, ज़ीरो-गैस एक्सीक्यूशन, ऑन-चेन ऑर्डरबुक ट्रेडिंग और deterministic ordering शामिल है। इसकी बड़ी चुनौती ये है कि ये प्रूव करे: इससे गहरी liquidity, ज्यादा मार्केट मेकर्स और वॉलेटाइल मार्केट्स में लंबा ट्रैक रिकॉर्ड दिखाए।
dYdX आर्किटेक्चर बेंचमार्क है। इसकी Cosmos-बेस्ड चेन ट्रेडिंग को फास्ट रखने के लिए इन-मेमोरी ऑर्डरबुक्स इस्तेमाल करती है, वहीं ब्लॉक्स फाइनल स्टेट को सिंक करते हैं।
AFX ट्रेडिंग प्रोसेस का ज्यादा हिस्सा ऑन-चेन ले आता है, जैसे ऑर्डर प्लेसमेंट, मैचिंग और सेटलमेंट। इससे ट्रेडर्स को और ज्यादा execution डेटा दिखता है, लेकिन परफॉर्मेंस की कसौटी भी और टफ हो जाती है।
Perp ट्रेडर्स स्लो कैंसिल, डिले मैचिंग और कमजोर लिक्विडेशन सिस्टम को जल्दी पनिश करते हैं।
AFX Vs. Lighter, Drift और Aevo
Lighter, Drift और Aevo असल में बताते हैं कि perp DEX फील्ड अब कितना वेरायटी में आ चुका है:
- Lighter मैचिंग और लिक्विडेशन के लिए ZK verification को हाईलाइट करता है;
- Drift Solana-नेटिव एक्सीक्यूशन का इस्तेमाल करता है जिसमें AMM और सेंट्रल लिमिट ऑर्डरबुक का हाइब्रिड सिस्टम है;
- Aevo डेरिवेटिव ट्रेडिंग के लिए EVM-बेस्ड optimistic rollup का यूज़ करता है।
AFX वर्टिकल कंट्रोल से अलग दिखता है। यह स्पेशल ट्रेडिंग L1 यूज़ करता है और कन्सेंसस, ऑर्डरबुक execution, सेटलमेंट, मार्जिन, लिक्विडेशन, APIs और ट्रेडर UX को एक ही डेडिकेटेड सिस्टम में को-ऑर्डिनेट करना चाहता है।
यही वो जगह है जहां AI-agent कॉर्नर बड़ी अहमियत ले लेता है। AFX एजेंट वॉलेट्स देता है जो ऑर्डर प्लेस, कैंसल, और मॉडिफाई कर सकते हैं, leverage और margin mode अपडेट कर सकते हैं, और प्राइवेट WebSocket डेटा भी पा सकते हैं।
साथ ही, यूज़र्स agent permissions को लिमिट कर सकते हैं जैसे withdrawal, ट्रांसफर, agent authorization, revocation और vault ऑपरेशन्स।
मार्केट स्ट्रेस के टाइम रिस्क डिज़ाइन
Perp DEX की क्वालिटी असली में तब दिखती है जब मार्केट वॉलेटाइल होता है। Mark-price डिजाइन, लिक्विडेशन मैकेनिक्स और बैकस्टॉप liquidity ये तय करते हैं कि ट्रेडर्स को ऑर्डरली execution मिलता है या अनस्टेबल लॉस सोशलाइजेशन का सामना करना पड़ता है। स्ट्रॉन्ग ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म को ऐसे रिस्क कंट्रोल्स चाहिए जो तब भी काम करें जब प्राइस तेज़ी से मूव हो, liquidity कम हो जाए और leverage एक साथ अनवाइंड हो जाए।
AFX कई रिस्क कंट्रोल्स को हाइलाइट करता है: इसमें मूल ऑर्डरबुक डेटा और बाहरी एक्सचेंज फीड्स पर आधारित मैनिपुलेशन-रेसिस्टेंट मार्क प्राइसिंग, स्टेज्ड लिक्विडेशन, इसके वॉल्ट के जरिए बैकस्टॉप लिक्विडिटी, और हर मार्केट में कैप्ड ओपन इंटरेस्ट शामिल हैं।
सिक्योरिटी भी एक अहम मुद्दा है। Zellic के पब्लिक ऑडिट रिपॉजिट्री में मई 2026 का AFX Bridge ऑडिट EVM पर लिस्टेड है, जो ब्रिज के लिए थर्ड-पार्टी ऑडिट को सपोर्ट करता है।
इंसेंटिव्स और ट्रेडर एलाइन्मेंट पर एक नोट
पर्प DEXs अक्सर पॉइंट्स, रिबेट्स, फी टियर्स, मेकर रिवार्ड्स, वॉल्ट यील्ड और रेवेन्यू शेयरिंग के जरिए कम्पीट करते हैं। ये टूल्स ऑर्डर फ्लो ला सकते हैं, मार्केट मेकर्स अट्रैक्ट कर सकते हैं, और एक्टिव ट्रेडर्स को रिवॉर्ड कर सकते हैं। हालांकि, लॉन्ग-टर्म वैल्यू डिपेंड करती है कि रिवार्ड्स कम होने के बाद लिक्विडिटी कितनी टिकती है।
AFX का VIP प्रोग्राम इसका अच्छा उदाहरण है, जिसमें हाई-वॉल्यूम ट्रेडर्स को कम फीस और प्लेटफॉर्म फीस रेवेन्यू का एक हिस्सा मिल सकता है। यहां 30% से 50% प्रोटोकॉल रेवेन्यू एलिजिबल टियर्स में अलोकेट होता है।
यह जरूरी है कि AFX का रेवेन्यू शेयरिंग प्रोफेशनल ट्रेडर्स को अट्रैक्ट कर सकता है, लेकिन इसकी टिकाऊपन पर असर डालेगा इसका एक्सीक्यूशन क्वालिटी, स्प्रेड्स, ओपन इंटरेस्ट, ट्रेडर रिटेंशन और अन्य फैक्टर्स।
AFX टोकनोमिक्स और कम्युनिटी डिस्ट्रीब्यूशन
AFX की टोकनोमिक्स भी इसकी एक्टिव-ट्रेडर पोजिशनिंग को सपोर्ट करती है। यह मॉडल सबसे पहले कम्युनिटी डिस्ट्रीब्यूशन पर बना है, जिसमें 1 बिलियन टोकन की सप्लाई का 73% हिस्सा जेनिसिस डिस्ट्रीब्यूशन, प्रोटोकॉल इंसेंटिव्स, कोर कम्युनिटी और इकोसिस्टम डेवलपमेंट के लिए अलोकेट किया गया है।
सबसे बड़ा हिस्सा है प्रोटोकॉल इंसेंटिव्स का, जो 30% है। इसका मतलब टोकन मॉडल ongoing ट्रेडिंग, लिक्विडिटी पार्टिसिपेशन और नोड staking को रिवॉर्ड करता है, केवल शुरुआती एक्सेस को नहीं।
जेनिसिस डिस्ट्रीब्यूशन सप्लाई का 27% है और TGE पर पूरी तरह अनलॉक हो जाता है, जिससे पहले दिन से ही मार्केट में अच्छा खासा फ्लोट आ जाता है, और लिक्विडिटी डिले अनलॉक के आसपास कंसन्ट्रेटेड नहीं होती।
AFX में कोई VC अलोकेशन या प्राइवेट राउंड्स नहीं हैं, जिससे इसका टोकन मॉडल यूजर-पार्टिसिपेशन पर फोकस करता है, न कि सिर्फ प्राइवेट-इन्वेस्टर अलोकेशन पर। कोर कॉन्ट्रिब्यूटर को 19% सप्लाई दी जाती है, जिसमें कोई TGE अनलॉक नहीं है, एक साल की क्लिफ है, और 36 महीने की लिनियर वेस्टिंग है। इससे कॉन्ट्रिब्यूटर्स के इंसेंटिव्स लॉन्ग-टर्म प्रोटोकॉल डेवलपमेंट से जुड़े रहते हैं, न कि तुरंत लिक्विडिटी से।
ट्रेज़री एलोकेशन 8% पर सेट की गई है, और इसका उद्देश्य गवर्नेंस और फाउंडेशन के विवेक के अंतर्गत कम्प्लायंस, इन्फ्रास्ट्रक्चर और रिस्क रिज़र्व ज़रूरतों के लिए है। पॉइंट्स मौजूदा यूजर एक्टिविटी को भविष्य की टोकन डिस्ट्रीब्यूशन से जोड़ते हैं, जिसमें तीन सीजन में कुल 1 करोड़ पॉइंट्स का पूल फिक्स है और TGE पर इसका कन्वर्ज़न अपेक्षित है।
AFX वास्तव में किनके लिए बना है
AFX उन ट्रेडर्स के लिए सबसे ज्यादा समझदारी रखता है, जो सिर्फ सिंपल लीवरेज्ड एक्सपोजर के बजाय एक्सीक्यूशन कंट्रोल की परवाह करते हैं।
- एक्टिव पर्प ट्रेडर्स जो ऑर्डर बुक ट्रेडिंग, फास्ट ऑर्डर प्लेसमेंट, और एंट्री, एग्जिट व कैंसिलेशन पर ज्यादा कंट्रोल चाहते हैं।
- मार्केट मेकर्स और हाई-वॉल्यूम ट्रेडर्स जिन्हें कम फीस, API एक्सेस, प्रिडिक्टेबल सीक्वेंसिंग और एक्सीक्यूशन क्वालिटी को मॉनिटर करने के लिए टेक्निकल ट्रांसपेरेंसी चाहिए।
- ऑन-चेन नेटिव ट्रेडर्स जो पब्लिक सेटलमेंट, विजिबल ऑर्डर फ्लो और ऐसा ट्रेडिंग स्टैक पसंद करते हैं जिसमें ज्यादातर एक्सचेंज प्रोसेस ऑन-चेन ही रहता है।
- ऑटोमेटेड स्ट्रेटेजी बिल्डर्स जिन्हें एजेंट वॉलेट्स, प्राइवेट वेब-सॉकेट डेटा, और बोट्स या AI असिस्टेड ट्रेडिंग सिस्टम्स के लिए परमिशन कंट्रोल्स चाहिए।
- ऐसे ट्रेडर्स जो क्रिप्टो पेयर्स से आगे देख रहे हैं और जो क्रिप्टो-नेटिव प्लेटफॉर्म पर स्टॉक्स, इंडाइसेज़, मेटल्स और कमोडिटी में पर्पेट्युअल एक्सपोजर चाहते हैं।
AFX कैज़ुअल यूज़र्स, पैसिव DeFi इनवेस्टर्स, या ऐसे ट्रेडर्स के लिए कम उपयुक्त है जो सिर्फ सिंपल लीवरेज्ड प्रोडक्ट में न्यूनतम सेटअप के साथ डील करना चाहते हैं। यह उन यूज़र्स के लिए भी फर्स्ट चॉइस नहीं है जो सबसे डीप लिक्विडिटी, सबसे लंबा ऑपरेशन इतिहास या सबसे ज्यादा स्ट्रेस-टेस्टेड ट्रैक रिकॉर्ड को प्राथमिकता देते हैं।
इन ट्रेडर्स के लिए, Hyperliquid, dYdX या GMX तब तक ज्यादा सुरक्षित महसूस हो सकते हैं जब तक कि AFX अपनी लिक्विडिटी, अपटाइम और लिक्विडेशन डिजाइन को और ज्यादा वोलैटाइल मार्केट साइकिल्स में साबित नहीं कर देता।
खुला मुद्दा यह है कि सबूत क्या है। AFX के पास शुरुआती वॉल्यूम, एक डिफाइंड टेक्निकल थीसिस और एक्टिव ट्रेडर्स को टारगेट करने वाले फीचर्स हैं, लेकिन सबसे मजबूत पर्प प्लेटफॉर्म समय के साथ आंकलन किए जाते हैं। लिक्विडिटी डेप्थ, वोलैटिलिटी के समय अपटाइम, लिक्विडेशन बिहेवियर, इंडिपेंडेंट ऑडिट्स और ट्रेडर रिटेंशन—ये लॉन्च मेट्रिक्स से ज्यादा मायने रखते हैं।









