Bitcoin ने 3 जून, 2026 को लगभग $63,000 तक गोता लगाया, क्योंकि मार्केट में भारी वोलैटिलिटी और एग्रेसिव डिलेवरेजिंग के बीच कुल क्रिप्टो लिक्विडेशन $1.1 बिलियन से भी ज्यादा पहुंच गई।
हम आपको बताएंगे इस सेल-ऑफ़ के पीछे के मुख्य कारण, डेटा क्या दर्शाता है और अब हर ट्रेडर को कौन-से लेवल्स पर ध्यान देना चाहिए।
Bitcoin ने फरवरी के बाद सबसे लोएस्ट डेली कैंडल क्लोज दिखाई
क्रिप्टो लिक्विडेशन तब होती है जब लिवरेज ट्रेडिंग पोजिशंस को मजबूरन बंद करना पड़ता है क्योंकि प्राइस के सपोर्ट लेवल टूट जाते हैं। हाल ही में Bitcoin $63,092 तक गिरा, जिससे सैकड़ों मिलियन डॉलर की लॉन्ग बेट्स की लिक्विडेशन हो गई।
CoinGlass के डेटा के मुताबिक, 24 घंटों में टोटल क्रिप्टो लिक्विडेशन $1.1 बिलियन के पार गई, जिसमें $945 मिलियन लॉन्ग पोजिशंस में थी, जिन्हें सबसे ज्यादा नुकसान हुआ।
इस मूवमेंट के पीछे कई ड्राइवर्स रहे। Iran को लेकर जारी जियोपॉलिटिकल टेंशन ने रिस्क असेट्स पर दबाव डाला, वहीं स्पॉट Bitcoin ETF में ऑउटफ्लो की रिपोर्ट्स ने क्रिप्टो और ट्रेडिशनल मार्केट दोनों में इंस्टीट्यूशनल प्रेशर बढ़ाया।
Strategy ने डिविडेंड ऑब्लिगेशन को फंड करने के लिए एक छोटी Bitcoin सेल भी की, यह 2022 की FTX क्रैश के बाद उनकी पहली सेल थी। हालांकि यह रकम उनकी कॉरपोरेट ट्रेजरी के मुकाबले बहुत छोटी है, लेकिन इस कदम से ग्लोबल क्रिप्टो ट्रेडिंग में सतर्कता और बढ़ गई।
मैक्रोइकॉनॉमिक अनसर्टेनटी ने पूरी तस्वीर को कवर किया। अमेरिका में जॉब्स डेटा रिलीज़ होना है, हाल की रैली के बाद प्रॉफिट-टेकिंग और Crypto Fear & Greed Index पर “Extreme Fear” ज़ोन में गिरावट ने पैनिक और बढ़ा दी।
BTC प्राइस के लिए आगे क्या?
सेल-ऑफ़ की वजह से पूरा क्रिप्टोकरेन्सी मार्केट प्रभावित हुआ। Ethereum $1,800 से नीचे गिर गया, Solana और अन्य बड़े कॉइन्स में और ज्यादा प्रतिशत में गिरावट आई, वहीं XRP ने इसी ट्रेडिंग विंडो में इस साल का सबसे निचला स्तर छू लिया।
विश्लेषकों में इस बात को लेकर मतभेद है कि आगे क्या होगा। $64,000 के पास सपोर्ट का टेस्ट हो चुका है, और कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ग्लोबल मैक्रो हेडविंड्स बढ़ते हैं और लिक्विडेशन और बढ़ते हैं तो Bitcoin $60,000 या उससे भी नीचे जा सकता है।
वहीं कुछ लोग इस गिरावट को खरीदारी का मौका मान रहे हैं। ट्रेडर्स का कहना है कि Bitcoin की ऐतिहासिक मजबूती, इंस्टिट्यूशनल इंटरेस्ट और लीवरेज के काफी कम हो जाने से अब रिकवरी के लिए मजबूत आधार मिल सकता है, अगर डिमांड दोबारा आती है तो।
फिलहाल, मार्केट रिक्स-ऑफ़ मोड में है। वॉलेटिलिटी अभी भी ज्यादा बनी हुई है और ट्रेडर्स अब पैनिक के बजाय $-कॉस्ट एवरेजिंग और patience (धैर्य) रखने पर जोर दे रहे हैं, खासकर जबरदस्त सेलिंग के इस environment में।









