Q2 में मार्केट वोलैटिलिटी के बावजूद 4 Airdropped Tokens ने मारी बाजी

  • Q2 के 8 में से 4 airdrop टोकन लॉन्च के बाद बढ़े, CryptoRank ने बताया
  • Genius में 120% की छलांग, Gensyn में 65% से ज्यादा गिरावट
  • Delphi का कहना है अब airdrop का दौर खत्म, ज्यादातर लोग 90 दिन में बेच देते हैं

CryptoRank द्वारा ट्रैक किए गए Q2 2026 के आठ airdrop टोकन्स में से आधे टोकन्स ने डेब्यू के बाद अपनी वैल्यू खो दी, जबकि Genius (GENIUS) में 120% की जोरदार तेजी आई और Gensyn (AI) 65% से ज्यादा गिर गया।

यह बंटवारा मार्केट में लिस्टिंग के बाद डिमांड बनाए रखने वाले प्रोजेक्ट्स और तुरंत वैल्यू गंवाने वाले प्रोजेक्ट्स के बीच बढ़ती खाई को दिखाता है। CryptoRank ने हर टोकन के टोकन जेनरेशन इवेंट के बाद उसकी फुली डायल्यूटेड वैल्यूएशन में हुए बदलाव को मापा।

Genius टोकन Q2 Airdrop Gainers में 120% वैल्यूएशन की बड़ी छलांग के साथ सबसे आगे

चार प्रोजेक्ट्स ने पॉजिटिव टेरिटरी में जगह बनाई। Genius, Shuttle Labs का एक नॉन-कस्टोडियल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है, जिसने अपने $170 मिलियन के डेब्यू वैल्यूएशन से 120% का सबसे बड़ा गेन किया।

o1.exchange (O), जो पिछले हफ्ते लॉन्च हुआ, उसने 77.9% का गेन दिखाया। इसके बाद Billions Network (BILL) ने 73% और Re Protocol (RE) ने 64.5% की बढ़त दर्ज की।

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Airdrop के बाद टोकन्स का प्रदर्शन
Airdrop के बाद टोकन्स का प्रदर्शन। स्रोत: X/CryptoRank

वहीं, जो टोकन्स गिरे, उनमें गिरावट ज्यादा तेज रही। Gensyn, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए ओपन इन्फ्रास्ट्रक्चर लेयर है, उसकी वैल्यूएशन $726 मिलियन से 65.2% गिर गई। Fluent (BLEND) में 56.8% की गिरावट आई, जबकि Solstice (SLX) और Pharos (PROS) क्रमशः 41.4% और 37.5% लुढ़क गए।

खास बात यह है कि कई गिरने वाले टोकन्स ने जितने पर लॉन्च हुए, वह वैल्यू विजेताओं से कहीं ज्यादा थी। Pharos और Gensyn दोनों ही $700 मिलियन से ऊपर डेब्यू किए, जिससे उनके गिरने का स्कोप बढ़ गया।

ये मिले-जुले नतीजे ऐसे वक्त में आए हैं जब खुद airdrop मॉडल पर सवाल उठ रहे हैं। Delphi Digital ने हाल में तर्क दिया कि अब airdrop स्ट्रैटेजी का असर खत्म हो रहा है क्योंकि इससे नए वफादार टोकन होल्डर की बजाय ज्यादा सेलर्स पैदा हो रहे हैं।

उनकी स्टडी में पिछले पांच साल में छह बड़े टोकन के लिए 3.7 मिलियन वॉलेट्स ट्रैक किए गए। पाया गया कि 78% से 94% वॉलेट धारकों ने 90 दिनों के अंदर अपनी पूरी अलॉटमेंट बेच दी।

Q2 के ये डाटा इस थ्योरी को और मजबूत कर रहे हैं। अब जब आधे टोकन्स ही वैल्यू बनाए रख पाए, तो अगले क्वार्टर्स में पता चलेगा कि क्या परफॉर्मेंस लिंक्ड मॉडल गिवअवे प्लेबुक की जगह लेंगे।

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