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Ripple और Hyperliquid की डील HYPE के लिए बड़ी जीत, XRP को खास फायदा नहीं

  • Ripple Prime ने Hyperliquid के ऑनचेन डेरिवेटिव्स के लिए इंस्टीट्यूशनल एक्सेस शुरू किया, जिससे liquidity और एडॉप्शन बढ़ेगा
  • इंटीग्रेशन से Hyperliquid का लॉन्ग-टर्म केस मजबूत, HYPE के लिए साफ तौर पर बुलिश
  • XRP को सीधा फायदा नहीं, क्योंकि डील में XRP का इस्तेमाल जरूरी नहीं

Ripple ने घोषणा की है कि Ripple Prime, इसका संस्थागत प्राइम ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म, अब Hyperliquid को सपोर्ट करता है, जो एक तेजी से बढ़ता हुआ ऑन-चेन डेरिवेटिव्स प्लेटफॉर्म है।

पहली नजर में, यह खबर Ripple के इकोसिस्टम के लिए काफी बुलिश लगती है। लेकिन जब ध्यान से देखें, तो इसके फायदे समान रूप से नहीं बंटे हैं: यह डील स्ट्रक्चरल तरीके से Hyperliquid और उसके HYPE टोकन के लिए पॉजिटिव है, जबकि XRP पर इसका असर काफी सीमित है।

Ripple Prime असल में करता क्या है

Ripple Prime कोई exchange नहीं है। यह एक प्राइम ब्रोकर है, यानी यह बड़ी ट्रेडिंग फर्म्स और संस्थाओं के लिए एक सिंगल एक्सेस पॉइंट की तरह काम करता है।

अलग-अलग exchanges पर अकाउंट खोलने और collateral को अलग-अलग मैनेज करने की जगह, संस्थाएं एक प्राइम ब्रोकर का इस्तेमाल करती हैं ताकि वे:

  • एक ही अकाउंट से मल्टीपल एसेट क्लासेस की ट्रेंडिंग कर सकें
  • सिर्फ एक collateral पूल पोस्ट करें
  • रिस्क मैनेजमेंट और रिपोर्टिंग को सेंट्रलाइज करें

Ripple Prime पहले से ही क्लाइंट्स को क्रिप्टो, FX, फिक्स्ड इनकम और डेरिवेटिव्स मार्केट्स से जोड़ता है। अब इस अपडेट के साथ, Hyperliquid उन execution venues में शामिल हो गया है, जिनमें से क्लाइंट्स ऑर्डर एक्सेक्यूट कर सकते हैं

वहीं, Hyperliquid फिलहाल सबसे पॉपुलर ऑन-चेन डेरिवेटिव्स एक्सचेंज है, जो खासकर perpetual futures के लिए फेमस है। यहां ट्रेड्स ऑन-चेन स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स के जरिए सेटल होती हैं, और कोई सेंट्रलाइज्ड एक्सचेंज यूजर फंड्स को होल्ड नहीं करता।

यह डिजाइन क्रिप्टो-नेटिव ट्रेडर्स के लिए तो बढ़िया है, लेकिन संस्थाओं के लिए इसमें दिक्कत होती है। ज्यादातर फंड्स वॉलेट मैनेज नहीं कर सकते, ट्रांजैक्शंस साइन नहीं कर सकते, या सीधे DeFi प्रोटोकॉल से इंटरैक्ट नहीं कर सकते।

Ripple Prime का इंटीग्रेशन इस समस्या का समाधान देता है।

अब संस्थाएं Hyperliquid पर बिना सीधे वॉलेट या स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स को छुए ट्रेड कर सकती हैं। Ripple Prime दोनों के बीच खड़ा होता है, और collateral, margin, settlement, और risk को हैंडल करता है। Hyperliquid लिक्विडिटी और ऑन-चेन execution प्रोवाइड करता है।

यह HYPE के लिए बुलिश, XRP के लिए नहीं

Hyperliquid के लिए इसके इम्प्लीकेशंस साफ हैं। नया संस्थागत ट्रेडिंग फ्लो अब संभव है।

साथ ही, जैसे-जैसे बड़े और ज्यादा स्टेबल पार्टिसिपेंट्स इन्वॉल्व होंगे, लिक्विडिटी गहरी होगी। कुल मिलाकर, Hyperliquid की संस्थागत लेवल पर क्रेडिबिलिटी बढ़ेगी

सबसे खास बात, Hyperliquid ये सब बिना अपना प्रोटोकॉल बदले या सेंट्रलाइज्ड बने हासिल करता है। Ripple Prime सिर्फ एक एक्सेस लेयर की तरह काम करता है, न की मालिक या कंट्रोलर के तौर पर।

पिछले हफ्ते का HYPE प्राइस चार्ट। स्रोत: CoinGecko
पिछले हफ्ते का HYPE प्राइस चार्ट। स्रोत: CoinGecko

यह Hyperliquid के लॉन्ग-टर्म ग्रोथ नैरेटिव को और मजबूत करता है, जो HYPE को सीधे सपोर्ट करता है

इसके विपरीत, Ripple के XRP टोकन से कनेक्शन काफी कमजोर है।

इस इंटीग्रेशन के लिए न तो ट्रेडिंग या मार्जिन में XRP की जरूरत है और न ही Hyperliquid की एक्टिविटी को XRP Ledger के जरिए रूट किया जाता है। यानी, XRP का जरूरी यूस नहीं बनता।

XRP फिर भी Ripple Prime के अंदर सेटलमेंट या लिक्विडिटी मैनेजमेंट के लिए यूज किया जा सकता है, लेकिन इसका यूस ऑप्शनल है, यूज़र्स के लिए इनविज़िबल है और इससे टोकन की डिमांड पर सीधा असर शायद ही पड़े।

सबसे जरूरी बात

Ripple–Hyperliquid पार्टनरशिप को इंस्टिट्यूशनल एक्सेस डील के रूप में समझना बेहतर है, न कि टोकन-लेवल इंटीग्रेशन के तौर पर।

यह Hyperliquid की इंस्टिट्यूशनल वॉल्यूम अट्रैक्ट करने की क्षमता को काफी बेहतर बनाता है, जिससे HYPE का लॉन्ग-टर्म वैल्यू प्रोस्पेक्ट मजबूत होता है। वहीं XRP के लिए, इसका असर बहुत इनडायरेक्ट ही है।


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