US SEC (Securities and Exchange Commission) ने मंगलवार को एक नया नियम प्रस्तावित किया, जिसमें पब्लिक कंपनियों को साल में दो बार रिपोर्टिंग की छूट मिलेगी। पहले साल में चार बार रिपोर्टिंग करनी होती थी। जो कंपनियां इस विकल्प को चुनती हैं, उनके लिए नया Form 10-S पेश किया जाएगा, जो वर्तमान quarterly Form 10-Q की जगह लेगा।
डिजिटल एसेट कंपनियों और अन्य इश्यूअर्स के लिए फिलहाल यह विकल्प मिलता है – वे तुरंत कंप्लायंस खर्च घटा सकते हैं, लेकिन साथ ही जानकारी में लंबा गैप भी रहेगा। एनालिस्ट्स का कहना है कि यह गैप लिक्विडिटी डिस्काउंट और ज्यादा लागत पर पूंजी जुटाने की समस्या ला सकता है।
कॉस्ट सेविंग्स बनाम लिक्विडिटी डिस्काउंट
जो कंपनियां यह नया तरीका अपनाएंगी, उन्हें Form 10-S हाफ-ईयर खत्म होने के 40 से 45 दिन के अंदर फाइल करना होगा। कंपनियों की फाइलिंग कैटेगरी के हिसाब से डेडलाइन तय होगी। Long-Term Stock Exchange के पेटिशन के मुताबिक, हर क्वार्टर फाइनेंशियल स्टेटमेंट तैयार करने में 1,000 घंटे और $100,000 से ज्यादा खर्च आ जाता है।
“पब्लिक कंपनियों को Exchange Act Section 13(a) या 15(d) के तहत फिलहाल Form 10-Q पर क्वार्टरली रिपोर्ट फाइल करनी पड़ती है। अगर प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं, तो ये पब्लिक कंपनियां नया Form 10-S चुनकर क्वार्टरली रिपोर्ट की जगह सेमी-एनुअल रिपोर्ट जमा कर पाएंगी,” SEC की अनाउंसमेंट में बताया गया।
यह कॉस्ट सेविंग यही दर्शाती है कि छोटी कंपनियां यह विकल्प क्यों चुन सकती हैं। MicroStrategy, Coinbase, और अन्य Bitcoin (BTC) ट्रेजरी ऑपरेटर्स हर क्वार्टर में ऑडिट और रिव्यू की बड़ी लागत झेलते हैं।
अकादमिक रिसर्च, जिसका हवाला पेटिशन में दिया गया, दिखाती है कि जबरन क्वार्टरली रिपोर्टिंग से छोटे फर्म का मूल्य औसतन 5% तक घट जाता है। इसका मतलब है कि जो कंपनियां इस ऑप्शन से बाहर होती हैं, उनके लिए वैल्युएशन में उछाल आ सकता है।
दूसरी तरफ, इससे ट्रांसपेरेंसी (पारदर्शिता) कम हो जाएगी। इनवेस्टर एडवोकेट्स का कहना है कि सेमी-एनुअल फाइलर्स को कम एनालिस्ट कवरेज और ट्रेडिंग वॉल्यूम का सामना करना पड़ सकता है।
इससे शेयर प्राइस में स्थायी लिक्विडिटी डिस्काउंट भी आ सकता है। ज्यादा रिस्क प्रीमियम की वजह से मिड-कैप कंपनियों के लिए पूंजी जुटाना भी महंगा हो सकता है।
SEC चेयर Paul Atkins का मानना है कि मार्केट खुद-ब-खुद वॉलंटरी अपडेट्स के जरिए बैलेंस हो जाएगा, जो उनकी बड़ी मार्केट नीति का ही हिस्सा है।
“पब्लिक कंपनियों पर फेडरल सिक्योरिटीज़ कानून के तहत निवेशकों के लिए जरूरी जानकारियाँ देने की जिम्मेदारी होती है। लेकिन, SEC के नियमों की कठोरता की वजह से कंपनियाँ और उनके निवेशक खुद के लिए सही इंटरिम रिपोर्टिंग फ्रिक्वेंसी तय नहीं कर पा रहे हैं, जो उनके बिजनेस और निवेशकों के लिए सबसे बेहतर होती,” इस घोषणा में SEC चेयर Paul Atkins को कोट करते हुए कहा गया।
प्रपोज़ल रिलीज़ के फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित होने के बाद 60 दिनों तक पब्लिक कमेंट के लिए ओपन रहेगा। असली परीक्षा यह है कि वॉलंटरी डिस्क्लोज़र और 8-K फाइलिंग्स, मस्ट क्वार्टरली डेटा की कमी को पूरा कर पाएंगी या नहीं।
अगर ऐसा हुआ, तो इसमें शामिल होने से कंपनियों की कॉस्ट सेविंग होगी। अगर नहीं, तो छोटे इश्यूअर्स को शॉर्ट-टर्म राहत के बदले परमानेंट वैल्यूएशन पेनल्टी झेलनी पड़ सकती है।
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