Tether के CEO Paolo Ardoino ने चेतावनी दी है कि Big Tech की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में हो रही भारी spending कमजोर इकॉनॉमिक्स पर टिकी हो सकती है, क्योंकि ग्लोबल मार्केट्स में AI मार्केट बबल को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
4 जुलाई की X पोस्ट में Ardoino ने कहा कि AI इन्फ्रास्ट्रक्चर की दौड़ में चार बड़े “structural mismatches” हैं। यानी लागत, रेवेन्यू, इन्वेस्टमेंट टाइमलाइन और कम्पटीशन में बड़ा गैप है।
उनकी यह चेतावनी तब आई है जब दुनिया की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां सैकड़ों बिलियन $ डेटा सेंटर, चिप्स और पावर कैपेसिटी में झोंक रही हैं। इन्वेस्टर्स के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या AI उतना रेवेन्यू जेनरेट कर सकता है जिससे इतने बड़े खर्च को जस्टिफाई किया जा सके।
AI के लिए बिजनेस बहुत कम चार्ज कर रहे हैं
Ardoino का कहना है कि कंपनियां AI कंप्यूटिंग के लिए असली लागत के मुकाबले बहुत कम चार्ज कर रही हैं। आसान भाषा में, कुछ AI सर्विसेस सस्ती दिखती हैं क्योंकि कंपनियां कस्टमर्स को आकर्षित करने के लिए यूज के खर्च को सब्सिडाइज करती हैं।
ऐसे में ग्रोथ दिखने में जबरदस्त है लेकिन असल बिजनेस मॉडल उतना मजबूत नहीं है। अगर बाद में कंपनियां प्राइस बढ़ाती हैं तो यूजर्स कम खर्च कर सकते हैं। अगर वे प्राइस कम ही रखती हैं, तो उनके मार्जिन पर दबाव बना रहता है।
AI प्रॉफिट्स आने में समय लग सकता है
Big Tech कंपनियां इस समय जमकर खर्च कर रही हैं, लेकिन AI से प्रॉफिट्स आने में काफी समय लग सकता है। डेटा सेंटर, GPUs और पावर कॉन्ट्रेक्ट्स में भारी upfront इन्वेस्टमेंट की जरूरत होती है।
इससे आज के कैपिटल खर्च और भविष्य के कमर्शियल रिटर्न में बड़ा गैप बन जाता है। जितना बड़ा यह गैप होगा, कंपनियों पर उतना ही दबाव बढ़ेगा कि वे प्रूव करें कि AI एक मजबूत रेवन्यू सोर्स बन सकता है।
AI खुद ही तेजी से आउटडेट हो रहा है
AI चिप्स 3 से 5 साल में आउटडेट हो सकती हैं। जबकि AI इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए जो डेब्ट और इक्विटी ली जाती है, उसे चुकाने की टाइमलाइन आमतौर पर ज्यादा लंबी होती है।
इसका मतलब है कि कंपनियों को महंगा हार्डवेयर खत्म चुकता करने से पहले ही रिप्लेस करना पड़ सकता है। अगर डिमांड स्लो हो गई या प्राइसिंग नीचे आ गई, तो इकॉनॉमिक्स संभालना मुश्किल हो जाएगा।
इंडस्ट्री में जबरदस्त कम्पटीशन है
ओपन-सोर्स AI मॉडल्स तेजी से एडवांस हो रहे हैं, जिससे कॉमर्शियल AI प्रोवाइडर्स की प्राइसिंग पावर कमजोर हो सकती है। अगर सस्ती या फ्री अल्टरनेटिव्स भी अच्छी क्वालिटी की आने लगीं तो कस्टमर्स प्रीमियम प्राइस देने से बच सकते हैं।
ऐसे में कंपनियों के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किया पैसा रिकवर कर पाना मुश्किल हो जाएगा। इससे AI के हाई वैल्यूएशन को सपोर्ट करने वाले रेवेन्यू एक्सपेक्टेशन भी नीचे आ सकते हैं।
Ardoino की ये चेतावनी अब मार्केट्स में चल रही बड़ी डिबेट का हिस्सा बन गई है।
Chinese हेज फंड्स जैसे Wealspring Asset और Shanghai Banxia Investment Management Center ने भी अलर्ट किया है कि AI स्टॉक्स बबल जोन में हो सकते हैं। Wealspring ने reportedly कहा कि ग्लोबल AI स्टॉक्स “सुपर बबल” हैं, वहीं Banxia का मानना है कि करेक्शन के लिए जरूरी ट्रिगर शायद आ भी चुका है।
मुद्दा सीधा है। AI अब स्टॉक मार्केट के प्रदर्शन का बड़ा कारण बन चुका है, खासकर बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए। अगर इन्वेस्टर्स को AI खर्च से रिटर्न पर शक होने लगेगा, तो इसका असर टेक सेक्टर से बाहर भी फैल सकता है।
AI खर्च पहुंच सकता है ट्रिलियन $ के आंकड़े तक
JPMorgan का अनुमान है कि ग्लोबल AI से जुड़े खर्च 2030 तक $5.5 ट्रिलियन तक पहुंच सकते हैं। इसी दौरान Alphabet, Amazon, Meta, और Microsoft इस साल $720 बिलियन तक खर्च करने जा रहे हैं।
इतनी भारी खर्च AI को कंपनियों की कमाई, एनर्जी डिमांड, चिप डिमांड और क्रेडिट मार्केट में एक केंद्रीय भूमिका देता है।
Bank of England ने अक्टूबर 2025 में चेतावनी दी थी कि AI से संबंधित वैल्यूएशन dot-com बबल के लेवल के करीब पहुंच गए हैं। उन्होंने ये भी कहा था कि AI इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए ट्रिलियन $ की ज़रूरत पड़ सकती है, जिसमें बड़ा हिस्सा कर्ज के जरिए फंड किया जाएगा।
कुछ इन्वेस्टर्स का नजरिया उतना निगेटिव नहीं है। उनका मानना है कि आज की AI ट्रेडिंग dot-com दौर से अलग है, क्योंकि इस समय बूम को फंड कर रही बड़ी कंपनियां पहले से ही मजबूत कमाई और स्थापित बिजनेस रखती हैं।
Morgan Stanley का भी अनुमान है कि लगभग $3 ट्रिलियन की AI इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट 2028 तक इकोनॉमी का हिस्सा बन सकती है।
फिर भी, Ardoino का पॉइंट यही है कि असली खतरा AI इन्फ्रास्ट्रक्चर की इकोनॉमिक्स में छुपा है। अगर प्राइसिंग, प्रॉफिट्स, हार्डवेयर के जीवनकाल और कॉम्पिटिशन सही नहीं रहे, तो मार्केट AI डिमांड को लॉन्ग-टर्म रिटर्न में बदलने की मुश्किल को कम आंक रहा हो सकता है।









