Ethereum के को-फाउंडर Vitalik Buterin का कहना है कि AI बहुत नॉलेजेबल है लेकिन उसमें बहुत ज्यादा समझदारी नहीं है। उनके अनुसार, चैटबॉट्स लगभग हर चीज से जुड़ी रेफरेंस पकड़ सकते हैं, लेकिन वे सिर्फ टेक्स्ट की सतह पर ही जज कर पाते हैं, अंदरूनी तर्क को नहीं।
उनकी यह टिप्पणी X पर इस बहस के दौरान आई कि क्या आज चैटबॉट्स बेहतरीन ह्यूमन रीडर्स के बराबर हैं। ये गैप खास तौर पर उन क्रिप्टो ट्रेडर्स के लिए मायने रखता है, जो व्हाइटपेपर और गवर्नेंस प्रपोजल्स को AI टूल्स में डालते हैं और समरी के आधार पर एक्शन लेते हैं।
Harvard की एक क्लास ने बिना चैटबॉट्स के शुरू की बहस
यह चर्चा Wall Street Journal की Humanities 10 नामक स्टोरी से शुरू हुई, जो Harvard में नए स्टूडेंट्स के लिए एक कड़ी क्लास है। X पर शेयर की गई रिपोर्ट के हिसाब से, इस फॉल में अप्लिकेशन में 40% की बढ़ोतरी हुई और 180 स्टूडेंट्स ने 90 सीट्स के लिए कॉम्पिटिशन किया।
स्टूडेंट्स को हर हफ्ते एक मुश्किल किताब पढ़नी पड़ती है और इस कोर्स में डिवाइस का इस्तेमाल पूरी तरह बैन है। कई एप्लीकेंट्स ने कहा कि वे AI शॉर्टकट्स से बचने के लिए ऐसा कोर्स चुनना चाहते थे।
इसके जवाब में एक यूजर ने तर्क दिया कि आज के मॉडल्स क्लासिक्स पर डिस्कशन के लिए किसी भी ह्यूमन से बेहतर पार्टनर हैं क्योंकि इन्होंने सबकुछ पढ़ रखा है। लेकिन एक राइटर ने कहा कि फिलहाल चैटबॉट्स की फीडबैक उसके एस्सेज़ पर “बेकार” है।
Vitalik Buterin के अनुसार AI जजमेंट में क्या कमी है
इसके बाद Buterin ने इस चर्चा में हिस्सा लिया और नॉलेज और विजडम में फर्क को समझाया।
उन्होंने कहा, AI की नॉलेज को पहचानना आसान है, लेकिन इसकी लिमिटेड विजडम को समझना मुश्किल है क्योंकि विजडम, इंटेलिजेंस की तरह सीधे-सीधे वेरीफाई नहीं की जा सकती।
यह कमजोरी खासतौर पर तब दिखती है, जब कोई मॉडल पहली बार नया टेक्स्ट पढ़ता है। इसके मुकाबले, फेमस वर्क्स पहले से ही बहुत सारे ह्यूमन एनालिसिस के साथ ट्रेनिंग डेटा में होते हैं।
उनकी सतर्कता एक पैटर्न में फिट बैठती है। हाल ही में, Buterin ने चेतावनी दी कि AI अगले दो साल में क्रिप्टो सिक्योरिटी के की इलीमेंट्स को कमजोर कर सकता है। उन्होंने AI चैट्स के लिए एक ‘paranoid मोड’ भी बनाया है।
हर कोई उनकी इस शंका से सहमत नहीं है। कुछ इनवेस्टर्स का मानना है कि AI मैथ्स में पहले ही टॉप ह्यूमन माइंड्स को हरा चुका है।
इस बीच, क्रिप्टो टीम्स अभी भी ऑडिट्स, रिसर्च और गवर्नेंस समरीज को AI एजेंट्स के हवाले करती हैं। सतही तौर पर पढ़ाई गई चीज़ें स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट में छुपी खामी या टोकन की सप्लाई शेड्यूल जैसे जरूरी डिटेल्स को मिस कर सकती हैं।
Buterin का पॉइंट ये है कि फैक्ट्स को तो सोर्स से चेक किया जा सकता है, लेकिन किसी नए टेक्स्ट का सही मूल्यांकन आसान नहीं है। उन्होंने हाल ही में जिस AI मॉडल को सपोर्ट किया है जो हैकिंग को लिमिट करता है, वह भी इसी इंसान-चेकिंग की सोच को दर्शाता है।











