इस हफ्ते पांच बड़ी इकॉनमी में बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड्स दशकों के हाई स्तर पर पहुंच गई हैं। US और UK में ये स्तर 2007 के बाद पहली बार छुए गए हैं, वहीं Japan में 1996 के बाद पहली बार इतनी ऊंचाई देखने को मिली है।
Germany के 10-वर्षीय यील्ड ने 2009 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर छू लिया है, जबकि France की यील्ड 2008 के बाद पहली बार इतनी ऊपर गई है। $100 प्रति बैरल से ऊपर जाता ऑयल, इस हफ्ते होने वाली सेंट्रल बैंक की बैठकों से ठीक पहले मंदी की चिंता फिर से बढ़ा रहा है।
एक सिंक्रोनाइज्ड रीप्राइसिंग
ये मूवमेंट्स हाल के वर्षों में सबसे बड़े बॉन्ड सेल-ऑफ़ में से एक को दिखाते हैं। Middle East में आई नई तनाव की वजह से कच्चे तेल के प्राइस बढ़ रहे हैं, जिससे कंज्यूमर लेवल पर फिर से महंगाई बढ़ने का खतरा है।
इस प्रेशर ने यील्ड्स को ऐसे लेवल तक पहुंचा दिया है जो Bitcoin की क्रिएशन के बाद पहली बार देखने को मिले हैं।
सरकार द्वारा भारी कर्ज जारी करना इस दबाव को और बढ़ा रहा है। US बॉन्ड्स का यह सबसे खराब दशक दो सदियों में, इनवेस्टर्स को ज्यादा सप्लाई अब्जॉर्ब करनी पड़ रही है। Japan का करंट लोन, जो GDP के 200% से भी ऊपर है, Tokyo को खासतौर पर बढ़ती उधारी लागत के लिए एक्सपोज कर देता है।
यील्ड क्यों मायने रखती है
ज्यादा लॉन्ग-टर्म यील्ड्स मॉर्टगेज रेट्स, कॉरपोरेट लोन और गवर्नमेंट बजट पर असर डालती हैं। एनालिस्ट्स ने France को सबसे ज्यादा एक्सपोज बताया है।
“सबसे कमजोर देशों के वो सूवीरिन होते हैं, जिनकी फिस्कल डेफिसिट ज्यादा है, कर्ज का बोझ भारी है और जो बाहरी कैपिटल पर निर्भर हैं। France डेवेलप्ड मार्केट्स में सबसे अलग है।”
Masahiko Loo, State Street Investment Management में सीनियर फिक्स्ड इनकम स्ट्रैटजिस्ट ने CNBC को बताया।
मार्केट्स इस हफ्ते Fed के रेट डिसीजन के लिए भी तैयार हैं, ट्रेडर्स ने रेट बढ़ेगी इसकी संभावना ज्यादा मानी है। इससे ग्लोबल सेल-ऑफ़ या तो रुक सकता है या और बढ़ सकता है।
US, Europe और Japan में एक साथ यील्ड्स का बढ़ना सिर्फ एक देश की कहानी नहीं है। ये पूरी sovereign risk और inflation expectation की रीप्राइसिंग दिखाता है। ये ट्रेंड कब तक स्थिर रहेगा या और तेज़ होगा, ये आने वाले दिनों में सेंट्रल बैंक्स के जवाब पर निर्भर करेगा।









