दो साल पहले, हम AI का इस्तेमाल रिसर्च, लिखने और जानकारी को आसानी से एक्सेस करने के लिए करते थे। फिर इसमें और एडवांस फीचर्स आए — कोडिंग, कुछ ही मिनटों में एडवांस ऐप्स और सिस्टम बनाना, बिजनेस प्रोसेसेस को ऑटोमेट करना और स्टूडियो-लेवल इमेज व वीडियो बनाना। अब, AI सिस्टम्स पहले ही लाखों पेमेंट्स कर रहे हैं।
वहीं रेग्युलेटर्स अब तक इतनी तेज़ी से आगे नहीं बढ़ पाए हैं। जैसे-जैसे AI एजेंट्स का पैसों पर कंट्रोल बढ़ेगा, यह गैप खतरनाक हो सकता है।
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, New York में BeInCrypto ने हाल ही में एक रेग्युलेटरी पैनल का नेतृत्व किया जिसमें फ्यूचर ऑफ मनी समिट के दौरान इस प्रॉब्लम को लेकर एक्सपर्ट्स ने चर्चा की। इसमें शामिल थे Dottie Romo, Chief Risk and Control Officer (US Internal Revenue Service), Dino Cataldo Dell’Accio (UN Joint Staff Pension Fund), और Mastercard के Julius Moye।
AI पेमेंट्स अब बड़े पैमाने पर हो रहे हैं
BeInCrypto की State of AI Agent Payments 2026 रिसर्च बताती है कि मशीन-ड्रिवन पेमेंट्स अभी कैसे दिखते हैं।
23 जुलाई से 26 अगस्त के बीच, रिसर्चर्स ने Base और Solana पर 6.4 मिलियन x402 पेमेंट ट्रांज़ेक्शंस को ट्रैक किया जिनकी कुल वैल्यू $119,947 रही।
अधिकतर ट्रांसफर बहुत छोटे थे। 90.8% ट्रांसफर एक सेंट से भी कम के थे, लेकिन रिसर्च के मुताबिक, AI एजेंट ने लॉन्च के बाद से लगभग 200 मिलियन सेटलमेंट ट्रांज़ेक्शंस रिकॉर्ड किए हैं।
अभी ये अमाउंट छोटे इसलिए हैं क्योंकि ये एजेंट्स मुख्य रूप से डिजिटल रिसोर्सेज, जैसे डेटा, API एक्सेस या कंप्यूटिंग टास्क्स के लिए पेमेंट कर रहे हैं। ट्रांज़ेक्शन की इतनी ज़्यादा फ्रीक्वेंसी दिखाती है कि मशीन कॉमर्स कैसे अलग ढंग से काम करता है।
रेग्युलेटर्स को शायद एल्गोरिदम पर नज़र रखने के लिए एल्गोरिदम चाहिए होंगे
IRS की रिस्क चीफ ने चेतावनी दी कि पारंपरिक निगरानी सिस्टम्स इतनी स्पीड के साथ तालमेल नहीं बैठा पाएंगे।
“ये मिनटों में लाखों डिसीजन ले रहे हैं,” IRS की Dottie Romo ने कहा।
उन्होंने बताया कि रेग्युलेटर्स फिलहाल पीरियॉडिक रिपोर्ट्स पर ही निर्भर करते हैं ताकि फ्रॉड, कंट्रोल फैल्योर और दूसरे रिस्क को समझा जा सके। ऑटोमेटेड या ऑटोनॉमस फाइनेंस के दौर में ये तरीका बहुत स्लो साबित हो सकता है।
क्या इसका मतलब है कि अल्गोरिदम को दूसरे अल्गोरिदम की निगरानी करनी होगी? Romo ने कहा कि किसी न किसी तरह की ऑटोमेटेड सुपरविजन जरूरी होगी।
“हम उतनी तेज़ी से यह नहीं कर पाएंगे,” Romo ने कहा।
उन्होंने कहा कि मार्केट्स में रियल-टाइम में मॉनिटरिंग होनी चाहिए, लेकिन जरूरी फैसलों में इंसान जुड़े रहें।
किल स्विच किसके पास होगा?
Mastercard के Moye ने 2012 के Knight Capital टेडिंग हादसे और Terra/Luna जैसी घटनाओं को चेतावनी बताया, जहां बिना मजबूत सेफगॉर्ड के ऑटोमेटेड सिस्टम चल रहे थे।
उनका मॉडल यह मानता है कि मशीनें अनusual बिहेवियर को डिटेक्ट करेंगी और तुरंत प्रॉब्लम को ऑटोमेटिकली कंटेन करेंगी। अगर मामला गंभीर हुआ तो फिर इंसानों के पास एस्कलेट कर दिया जाएगा।
“असल में AI और मशीनों का इस्तेमाल टॉर्निकेट लगाने और ब्लीडिंग रोकने के लिए होगा, उसके बाद सर्जरी करने के लिए इंसान आएंगे,” Julius Moye, Manager, Mastercard’s Financial Crime Solutions ने कहा।
Dell’Accio का कहना है कि ऑटोमेशन से जिम्मेदारी नहीं हट सकती। उन्होंने कहा कि आखिरकार जवाबदेही तीन सवालों से तय होगी:
कोड किसने डेवलप किया? किसने कोड इंप्लीमेंट किया और कौन कोड की निगरानी करता है?”
एक डिस्टोपियन रियलिटी
सच्चाई यह है कि AI अब मॉडर्न फाइनेंस का दिखने वाला और आक्रामक हिस्सा बन गया है, इतना कि हर महीने मिलियन डॉलर की ट्रांजैक्शंस AI के जरिए हो रही हैं।
रेग्युलेटर्स इस गैप को असल में बंद नहीं कर सकते। इतनी तेज स्पीड पर इंसानी दखल मुमकिन नहीं। इसलिए जल्द ही वह वक्त आ सकता है, जब रेग्युलेटर्स को मशीनों की निगरानी के लिए भी मशीनों की जरूरत होगी।
यह सुनने में भले डिस्टोपियन लगे, लेकिन पॉलिसीमेकर्स पहले से इस पर चर्चा कर रहे हैं।









