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Binance की रिपोर्ट: AI स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट की कमजोरियों को पकड़ने के मुकाबले दोगुना बेहतर exploitation में

  • GPT-5.3-Codex ने EVMbench पर 72.2% exploit सफलता हासिल की, detection rate के मुकाबले डबल
  • AI-enabled exploits की लागत हर contract पर $1.22, हर दो महीने में 22% गिरावट का अनुमान
  • क्रिप्टो में 88% डिटेक्टेड deepfake फ्रॉड, 2025 में impersonation में 1,400% की बढ़ोतरी

Binance Research के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स अब स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स का शोषण करने में लगभग दोगुने असरदार हैं, जितना कि वे कमजोरियों का पता लगाने में हैं।

AI अब क्रिप्टो हैक्स से जुड़ी बातचीत का मुख्य हिस्सा बन चुका है। कई एनालिस्ट्स का मानना है कि अटैकर्स इन टूल्स का यूज़ करके DeFi एक्सप्लॉइट्स को अंजाम दे रहे हैं।

AI अटैक और डिफेंस के बीच गैप क्यों बढ़ रहा है

हाल ही में आए एक रिपोर्ट में, Binance Research ने नोट किया कि GPT-5.3-Codex EVMbench पर “एक्सप्लॉइट” मोड में 72.2% सक्सेस रेट परफॉर्म करता है। वहीं, “डिटेक्ट” मोड में उसका सक्सेस रेट लगभग इसका आधा है।

“चाहे हम स्वीकार करें या नहीं, AI अभी शोषण (exploitation) में डिटेक्शन से 2x बेहतर है,” रिपोर्ट में कहा गया। “अब की इकनॉमिक्स अटैकर्स के पक्ष में हैं।”

AI की डिटेक्शन और एक्सप्लॉइटेशन कैपेबिलिटीज
AI की डिटेक्शन और एक्सप्लॉइटेशन कैपेबिलिटीज। स्रोत: Binance

संदर्भ के लिए, EVMbench एक बेंचमार्क है जो ये मापता है कि AI एजेंट्स कैसे स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स की हाई-सेवेरिटी कमजोरियां डिटेक्ट, पैच और एक्सप्लॉइट कर सकते हैं। इसमें 40 ऑडिट्स से 117 क्यूरेटेड कमजोरियों का यूज़ किया गया है।

स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स में DeFi की दुनिया भर में बिलियन्स डॉलर्स के यूज़र फंड्स रखे जाते हैं। इनका ओपन-सोर्स कोड इन्हें ऑटोमेटेड जांच का आसान टार्गेट बनाता है। AI सिस्टम्स हजारों कॉन्ट्रैक्ट्स को मिनटों में और बेहद कम कीमत में स्कैन कर सकते हैं।

ये असमानता इसलिए बढ़ रही है क्योंकि अटैक की लागत लगातार कम हो रही है। Binance Research के डेटा के अनुसार, AI-पावर्ड एक्सप्लॉइट्स की एवरेज लागत लगभग $1.22 प्रति कॉन्ट्रैक्ट है, और ये हर दो महीने में लगभग 22% और कम होने का अनुमान है।

“Hacken का SSDLC Maturity Survey दिखाता है कि अब 80% से ज्यादा डेवेलपर्स डेवेलपमेंट में AI का यूज़ करते हैं, लेकिन 40% से भी कम AI को एडवांस्ड टेस्टिंग के लिए यूज़ करते हैं — इस वजह से अटैक और डिफेंस का गैप स्ट्रक्चरल तौर पर एकतरफा बना हुआ है,” Binance Research ने बताया।

ये खतरा सिर्फ स्टैटिक कोड तक सीमित नहीं है। TRM Labs के विश्लेषक मान रहे हैं कि North Korean हैकर्स अब अपनी रेकी और सोशल इंजीनियरिंग ऑपरेशन्स में AI को इंटीग्रेट कर रहे हैं।

इस बदलाव से Drift जैसे अटैक्स समझ में आते हैं, जिनमें कई हफ्ते तक टार्गेटेड ब्लॉकचेन सिस्टम्स की मैन्युपुलेशन की गई, जबकि North Korea आमतौर पर सिंपल प्राइवेट की कंप्रोमाइज पर निर्भर थी।

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AI क्रिप्टो फ्रॉड की इकनॉमिक्स को बदल रहा है

ऑनलाइन फ्रॉड की इकनॉमिक्स भी अब बहुत तेजी से बदल गई है। Chainalysis की रिपोर्ट में बताया गया है कि AI से चलने वाले स्कैम्स हर केस में पारंपरिक स्कैम से 4.5 गुना ज्यादा पैसा जुटाते हैं और ट्रांजेक्शन एक्टिविटी भी 9 गुना ज्यादा होती है।

फर्म ने यह भी नोट किया कि ट्रांजेक्शन वॉल्यूम में उछाल आने का कारण यह है कि AI की मदद से स्कैमर्स एक साथ बहुत अधिक लोगों को निशाना बना रहे हैं। यह इंडस्ट्रियल लेवल पर चल रहे फ्रॉड की पहचान है।

स्कैमर्स डीपफेक टेक्नोलॉजी और AI-जेनरेटेड कंटेंट का इस्तेमाल करके रोमांस और इन्वेस्टमेंट से जुड़े फ्रॉड में भरोसेमंद पहचान बना रहे हैं। खास बात यह है कि 2025 में केवल इम्पर्सोनेशन बेस्ड अटैक साल-दर-साल 1,400% तक बढ़ गए।

करीब 60% इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि क्रिमिनल्स द्वारा AI का बढ़ता इस्तेमाल 2025 में रिस्क एक्सपोजर का सबसे बड़ा कारण बनेगा। खासकर क्रिप्टो सेक्टर इसकी सबसे ज्यादा चपेट में है। ग्लोबली जितने भी डीपफेक फ्रॉड केस पकड़े गए हैं, उनमें 88% केस क्रिप्टो सेक्टर के हैं।

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