Microsoft के CEO Satya Nadella का कहना है कि हर कंपनी को अपना खुद का टोकन capital और ह्यूमन capital बनाना चाहिए। Nadella ने कहा कि AI इकोनॉमी में आगे बढ़ने के लिए कंपनियों को अपनी खुद की AI काबिलियत (जिसे उन्होंने टोकन capital कहा) और इंसानी judgment दोनों की जरूरत होगी।
Nadella का मानना है कि जैसे-जैसे टोकन capital बढ़ेगा, वैसे-वैसे ह्यूमन capital और ज्यादा valuable होता जाएगा।
AI इकोनॉमी में कंपनियों के लिए टोकन capital का मतलब क्या है?
CEO ने टोकन capital को एक कंपनी की खुद की proprietary AI काबिलियत, यानी वो सिस्टम्स और मॉडल्स जो कंपनी खुद बनाती और ओन करती है, के रूप में डिफाइन किया। Nadella ने इसे ह्यूमन capital से जोड़ा, जिसे उन्होंने एम्प्लॉयी नॉलेज, रिलेशनशिप्स और पैटर्न रिकग्निशन बताया। उन्होंने इंसानी दिशा को AI वैल्यू का असली इंजन बताया।
“सबसे जरूरी बात ये है कि जैसे-जैसे टोकन capital बढ़ता है, ह्यूमन capital कम valuable नहीं होता…अगर इंसानी दिशा न हो तो कंप्यूट सिर्फ़ चक्कर काटता रहेगा,” उन्होंने कहा।
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Nadella ने समझाया कि “असली मौका” सबसे स्ट्रॉन्ग मॉडल चुनने में नहीं है, बल्कि ऐसे लर्निंग लूप बनाने में है जो मॉडल्स के ऊपर बने हों, जहां इंसान और टोकन capital दोनों मिलकर ग्रो करें।
“आप कोई टास्क या जॉब सौंप सकते हैं, लेकिन अपनी लर्निंग नहीं सौंप सकते। कंपनी का फ्यूचर यही है कि वो इंसान और AI दोनों के बीच उस लर्निंग को बढ़ा सके,” उन्होंने जोड़ा।
उन्होंने एक नई आर्किटेक्चर की जरूरत बताई। हर बिजनेस ऐसे एजेंटिक सिस्टम्स बनाएगा जो समय के साथ बेहतर हों। कंपनियां फिर भी अपना IP खुद कंट्रोल करेंगी।
उनका फोकस एक इकोसिस्टम पर था, किसी एक frontier मॉडल पर नहीं। उन्होंने कहा कि वैल्यू कंपनियों, इंडस्ट्रीज और देशों के बीच फैलेगी। हर ऑर्गनाइजेशन अपना खुद का लर्निंग लूप ओन करेगा, जिससे उसकी इंस्टिट्यूशनल नॉलेज सेव रह सके।
यह लूप कंपनियों को बेस मॉडल बदलने का ऑप्शन देगा, वो भी बिना अपनी जमा नॉलेज खोए। Nadella के अनुसार,
“ये आपके कंट्रोल और sovereignty की असली ‘टेस्ट’ होगी आने वाले AI दौर में।”
उन्होंने बताया कि कैसे संस्थाएं अपनी खुद की डेटा पर प्राइवेट eval और रिइंफोर्समेंट लर्निंग एनवायरनमेंट बना सकती हैं। इससे वर्कफ्लो और judgment ऐसे सिस्टम्स में बदल जाएगा जो हर बार इस्तेमाल पर बेहतर होते जाएं।
उनकी वार्निंग एक ऐसे फ्यूचर के लिए थी, जहां कुछ बड़ी कंपनियां और बड़े मॉडल्स ज्यादातर वैल्यू अपने पास रखेंगे। उन्होंने इसे ग्लोबलाइजेशन से तुलना करते हुए कहा कि जैसे सालों पहले इंडस्ट्रियल इकोनॉमी खोखली हो गई थी, वैसा ही दोबारा हो सकता है।
“हममें से कोई भी ऐसा दुनिया नहीं चाहता जहां हर सेक्टर की हर कंपनी अपनी वैल्यू सिर्फ कुछ ऐसे मॉडल्स को सौंप दे जो हर चीज़ को निगल लेते हैं। अगर सारी वैल्यू सिर्फ कुछ ही मॉडल्स के पास आ जाती है, तो पोलिटिकल इकॉनमी इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। AI का ऐसा भविष्य जिसकी वजह से पूरी की पूरी इंडस्ट्रीज़ खाली हो जाएं, उसके लिए समाज से मंजूरी कभी नहीं मिलेगी,” इस एग्जीक्यूटिव ने कहा।
Nadella की पोस्ट ऐसे वक्त आई है जब एंटरप्राइज AI पर खर्चा कॉरपोरेट प्रेडिक्शंस से ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है, जिससे ये सवाल खड़ा हो गया है कि क्या ये पैसा खुद की क्षमता खरीद रहा है या सिर्फ कुछ प्रोवाइडर्स पर और ज्यादा डिपेंडेंसी बढ़ा रहा है।
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